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शुक्रवार, अक्टूबर 02, 2026

विवाह, गरिमा और मानवीय स्वतंत्रता के लिए एक वैश्विक विमर्श : तलाक किन परिस्थितियों में बेहतर विकल्प ?


चिंतन/आलेख : तलाक किन परिस्थितियों में बेहतर विकल्प?
विवाह, गरिमा और मानवीय स्वतंत्रता के लिए एक वैश्विक विमर्श

विवाह केवल दो व्यक्तियों का सामाजिक या कानूनी संबंध नहीं है; यह भावनाओं, विश्वास, जिम्मेदारियों, आर्थिक साझेदारी, पारिवारिक अपेक्षाओं और भविष्य की साझा कल्पनाओं से निर्मित एक जटिल मानवीय संस्था है। इसलिए जब किसी विवाह के सामने तलाक का प्रश्न आता है, तो यह केवल एक कानूनी प्रक्रिया का प्रश्न नहीं रहता। यह प्रश्न बन जाता है—क्या यह संबंध अपने मूल उद्देश्य, अर्थात् पारस्परिक सम्मान, सुरक्षा, विश्वास और गरिमा को अभी भी जीवित रखे हुए है?

समकालीन विश्व में तलाक को न तो हर वैवाहिक कठिनाई का समाधान माना जा सकता है और न ही हर परिस्थिति में विवाह बचाए रखना नैतिक रूप से उचित माना जा सकता है। वास्तविक प्रश्न यह है कि किस परिस्थिति में संबंध को बचाने का प्रयास मानवीय रूप से उचित है और किस परिस्थिति में वैवाहिक संबंध से अलग होना व्यक्ति की सुरक्षा, गरिमा और दीर्घकालीन हितों की रक्षा का अधिक उपयुक्त मार्ग हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार ढाँचा विवाह और उसके विघटन—दोनों में समानता और स्वतंत्र सहमति के महत्व को स्वीकार करता है। CEDAW के अनुच्छेद 16 में विवाह के दौरान तथा उसके विघटन के समय महिलाओं के समान अधिकार और जिम्मेदारियों को मान्यता दी गई है।

इसलिए तलाक को केवल “रिश्ता टूटना” कह देना शायद पर्याप्त नहीं है। कभी-कभी प्रश्न यह भी होता है कि क्या एक ऐसा संबंध, जिसमें व्यक्ति की गरिमा, सुरक्षा और स्वतंत्रता लगातार क्षतिग्रस्त हो रही हो, वास्तव में संबंध कहलाने योग्य रह गया है?

1. तलाक: असफलता या एक वैधानिक विकल्प?
समाज में तलाक को अक्सर असफल विवाह की अंतिम घोषणा की तरह देखा जाता है। लेकिन विवाह और तलाक दोनों को केवल सफलता-असफलता के द्वैत में देखना मानवीय संबंधों की जटिलता को सरल बना देना है।
विवाह तब सार्थक होता है जब उसमें दोनों व्यक्तियों की स्वतंत्र इच्छा, पारस्परिक सम्मान, संवाद और जिम्मेदारी मौजूद हो। उसी प्रकार तलाक भी तभी समझदारीपूर्ण निर्णय हो सकता है जब वह परिस्थितियों, अधिकारों, दायित्वों और संभावित परिणामों पर विचार करने के बाद लिया जाए।
मानवाधिकारों का मूल सिद्धांत यह है कि विवाह स्वतंत्र और पूर्ण सहमति पर आधारित होना चाहिए तथा विवाह के विघटन के समय भी समान अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। 
इस दृष्टि से तलाक को “विवाह-विरोधी” विचार के रूप में देखने के बजाय उसे एक कानूनी और मानवीय सुरक्षा-तंत्र के रूप में भी समझा जा सकता है—हालाँकि इसका प्रयोग परिस्थितिनिष्ठ होना चाहिए।

2. जब विवाह सुरक्षा के बजाय भय का स्रोत बन जाए
किसी भी वैवाहिक संबंध में मतभेद, क्रोध, आर्थिक तनाव और विचारों की असहमति असामान्य नहीं हैं। लेकिन हिंसा और सामान्य वैवाहिक मतभेद को एक ही श्रेणी में रखना गंभीर भूल होगी। 
शारीरिक हिंसा, यौन हिंसा, गंभीर मानसिक उत्पीड़न, धमकी, जबरदस्ती, अत्यधिक नियंत्रण या ऐसी परिस्थितियाँ जिनमें व्यक्ति की मूलभूत सुरक्षा लगातार खतरे में हो, सामान्य वैवाहिक मतभेद नहीं हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार intimate partner violence में शारीरिक, यौन और मनोवैज्ञानिक हिंसा तथा controlling behaviours शामिल हो सकते हैं। WHO यह भी रेखांकित करता है कि ऐसी हिंसा महिलाओं के शारीरिक, मानसिक, यौन और प्रजनन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है तथा बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण को भी प्रभावित कर सकती है। 
ऐसी परिस्थितियों में “परिवार बचाने” की सामाजिक अपेक्षा को व्यक्ति की सुरक्षा से ऊपर रखना उचित नहीं माना जा सकता।
यहाँ एक महत्वपूर्ण सिद्धांत सामने आता है—
परिवार का अस्तित्व महत्वपूर्ण है, लेकिन परिवार के भीतर व्यक्ति की गरिमा और सुरक्षा उससे कम महत्वपूर्ण नहीं है।

3. क्या हर संघर्ष तलाक का कारण है?
नहीं।
दो व्यक्तियों के बीच विचारों का अंतर, आर्थिक कठिनाई, ससुराल संबंधी तनाव, जीवनशैली का अंतर, संचार की कमी, पालन-पोषण को लेकर मतभेद या समय-समय पर होने वाले विवाद अपने आप में तलाक की अनिवार्य परिस्थितियाँ नहीं हैं।
मानवीय संबंधों में परिवर्तन स्वाभाविक है। कई विवाह संवाद, सीमाओं के पुनर्निर्धारण, पारिवारिक सहयोग, परामर्श अथवा अन्य उपयुक्त उपायों से बेहतर हो सकते हैं।
इसलिए तलाक पर विचार करने से पहले एक महत्वपूर्ण प्रश्न होना चाहिए—
क्या समस्या संबंध में स्थायी और मूलभूत टूटन है, या ऐसी समस्या है जिसे दोनों पक्ष वास्तविक इच्छा और सुरक्षित परिस्थितियों में सुधार सकते हैं?
इस प्रश्न का उत्तर प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक परिवार के लिए अलग हो सकता है।

4. जब विश्वास का आधार लगातार समाप्त हो जाए
विवाह केवल साथ रहने का समझौता नहीं है। इसमें विश्वास, पारदर्शिता और पारस्परिक उत्तरदायित्व का महत्वपूर्ण स्थान है।
यदि लंबे समय तक छल, गंभीर विश्वासघात, लगातार धोखाधड़ी या ऐसी परिस्थितियाँ बनी रहें जिनसे संबंध का बुनियादी विश्वास समाप्त हो जाए, तो दंपति को यह विचार करना पड़ सकता है कि क्या संबंध को पुनर्निर्मित करने की वास्तविक संभावना मौजूद है।
यहाँ भी किसी एक घटना को स्वतः तलाक का कारण मानना उचित नहीं होगा। महत्वपूर्ण यह है कि—
क्या गलती स्वीकार की गई है?
क्या सुधार की वास्तविक इच्छा है?
क्या व्यवहार में स्थायी परिवर्तन आया है?
क्या दूसरा पक्ष फिर से विश्वास स्थापित करने में सक्षम है?
क्या संबंध में सम्मान और सुरक्षा वापस आ सकती है?
यदि इन प्रश्नों के उत्तर लगातार नकारात्मक हों, तो विवाह की दीर्घकालीन व्यवहार्यता पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है।

5. जब विवाह व्यक्ति की गरिमा को लगातार नष्ट करने लगे
मानव गरिमा आधुनिक मानवाधिकार विमर्श का केंद्रीय सिद्धांत है।
विवाह किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति की संपत्ति नहीं बनाता। पति-पत्नी दोनों स्वतंत्र मानव व्यक्तित्व हैं। CEDAW विवाह और परिवार संबंधों में समानता तथा विवाह-विघटन के समय समान अधिकारों की आवश्यकता को स्पष्ट करता है।
इसलिए यदि कोई संबंध लगातार किसी व्यक्ति को अपमानित, नियंत्रित, अलग-थलग या उसकी स्वतंत्र निर्णय-क्षमता से वंचित करने का माध्यम बन जाए, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि उस संबंध को बनाए रखने की सामाजिक कीमत कितनी उचित है।
विवाह साथ रहने का अधिकार देता है; किसी व्यक्ति पर स्वामित्व का अधिकार नहीं।

6. बच्चों के कारण विवाह बचाना—एक जटिल प्रश्न
तलाक के निर्णय में बच्चों का प्रश्न सबसे संवेदनशील होता है।
सामान्य धारणा है कि बच्चे होने पर विवाह हर परिस्थिति में बचाया जाना चाहिए। लेकिन यह सार्वभौमिक सिद्धांत नहीं हो सकता। दूसरी ओर, बच्चों की उपस्थिति को तलाक का स्वतः आधार मानना भी उचित नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय बाल-अधिकार मानक बच्चों के “best interests” अर्थात् सर्वोत्तम हित को प्राथमिक विचार मानते हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अभिसमय के अनुच्छेद 3 में यह सिद्धांत स्पष्ट है। इसी अभिसमय में अलग रह रहे माता-पिता और बच्चों के संबंधों के संदर्भ में भी बच्चे के हित, सुरक्षा और परिस्थितियों पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई है। 
इसलिए वास्तविक प्रश्न यह नहीं होना चाहिए—
“बच्चे हैं, इसलिए तलाक नहीं हो सकता।”
बल्कि प्रश्न होना चाहिए—
“बच्चे के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, शैक्षणिक और सामाजिक हित किस व्यवस्था में बेहतर सुरक्षित रहेंगे?”
कभी-कभी सहयोगपूर्ण सह-अभिभावकत्व के साथ अलगाव बच्चों के लिए अधिक स्थिर वातावरण दे सकता है; दूसरी परिस्थितियों में माता-पिता के बीच सुधार और सहयोग के प्रयास अधिक उपयुक्त हो सकते हैं। इसका निर्णय तथ्य-विशेष पर निर्भर करता है।

7. हिंसा वाले परिवार में “समझौता” हमेशा समाधान नहीं
भारतीय और वैश्विक सामाजिक परिवेश में “समझौता कर लो”, “बच्चों के लिए सह लो”, “समाज क्या कहेगा” जैसी सलाह अक्सर सुनाई देती है।
समझौता तब सार्थक है जब दोनों पक्ष स्वतंत्र इच्छा से समाधान की ओर बढ़ रहे हों। लेकिन यदि समझौते का अर्थ हिंसा, धमकी या गंभीर उत्पीड़न को सहते रहना हो, तो यह समाधान नहीं बल्कि समस्या को लंबा खींचना हो सकता है।
WHO के अनुसार intimate partner violence के स्वास्थ्य परिणाम अल्पकालिक ही नहीं, दीर्घकालिक भी हो सकते हैं और हिंसा महिलाओं तथा बच्चों दोनों के स्वास्थ्य और कल्याण को प्रभावित कर सकती है। 
इसलिए “परिवार बचाने” और “व्यक्ति को बचाने” के बीच अंतर समझना आवश्यक है।

8. मानसिक दूरी और भावनात्मक विघटन
हर टूटता हुआ विवाह हिंसक नहीं होता।
कभी-कभी दो लोग वर्षों तक एक ही घर में रहते हुए भी भावनात्मक रूप से एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हो जाते हैं। संवाद समाप्त हो जाता है, साझा भविष्य की कल्पना समाप्त हो जाती है और संबंध केवल सामाजिक औपचारिकता बनकर रह जाता है।
लेकिन यहाँ भी सावधानी आवश्यक है।
अस्थायी भावनात्मक दूरी और स्थायी वैवाहिक विघटन एक ही बात नहीं हैं। जीवन के कठिन चरणों में संबंधों में दूरी आ सकती है। इसलिए तलाक का प्रश्न उठाने से पहले यह समझना आवश्यक है कि यह स्थिति अस्थायी संकट है या लंबे समय से चली आ रही अपरिवर्तनीय दूरी।

9. आर्थिक स्वतंत्रता और तलाक
तलाक का प्रश्न केवल भावनात्मक नहीं, आर्थिक भी है।
आवास, आय, संपत्ति, ऋण, बच्चों का पालन-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की आर्थिक स्थिरता—इन सभी का मूल्यांकन आवश्यक हो सकता है।
CEDAW की General Recommendation No. 29 विशेष रूप से विवाह और परिवार के विघटन के आर्थिक परिणामों पर ध्यान आकर्षित करती है और बताती है कि वैवाहिक संबंध टूटने के आर्थिक प्रभाव स्त्री और पुरुष पर समान रूप से नहीं पड़ सकते।
इसलिए किसी भी तलाक के निर्णय में भावनात्मक प्रश्न के साथ आर्थिक यथार्थ को भी देखना आवश्यक है।

10. तलाक का अर्थ बच्चों से संबंध समाप्त होना नहीं
विवाह का अंत और माता-पिता की भूमिका का अंत दो अलग बातें हैं।
यदि दंपति अलग होते हैं और उनके बच्चे हैं, तो बच्चों के प्रति माता-पिता की जिम्मेदारियाँ परिस्थितियों और लागू कानून के अनुसार बनी रह सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार ढाँचा भी इस बात पर बल देता है कि बच्चे के हितों को प्राथमिकता दी जाए और, जहाँ बच्चे के हितों के विपरीत न हो, अलग रह रहे माता-पिता और बच्चे के संबंध को बनाए रखने का अधिकार सम्मानित किया जाए।
इसलिए परिपक्व तलाक का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत हो सकता है—
पति-पत्नी अलग हो सकते हैं, लेकिन माता-पिता की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती।

11. तलाक का निर्णय भावनात्मक आवेग में नहीं
तलाक जीवन बदलने वाला निर्णय हो सकता है। इसलिए अत्यधिक क्रोध, अपमान, तत्काल प्रतिशोध या सामाजिक दबाव में लिया गया निर्णय बाद में जटिल परिणाम पैदा कर सकता है।
जहाँ सुरक्षित और उपयुक्त हो, वहाँ व्यक्ति निम्न प्रश्नों पर शांतिपूर्वक विचार कर सकता है—
क्या संबंध में सुरक्षा बनी हुई है?
क्या दोनों पक्ष सम्मानपूर्वक संवाद कर सकते हैं?
क्या समस्या सुधार योग्य है?
क्या सुधार के वास्तविक प्रयास पहले किए गए हैं?
क्या संबंध में हिंसा, धमकी या coercive control मौजूद है?
बच्चों के सर्वोत्तम हित क्या हैं?
अलग होने की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियाँ क्या होंगी?
क्या निर्णय स्वतंत्र इच्छा से लिया जा रहा है?
क्या लागू राष्ट्रीय कानून के अनुसार उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी?
क्या निर्णय किसी व्यक्ति को दंडित करने के लिए है या दीर्घकालीन जीवन की सुरक्षा और स्थिरता के लिए?
इन प्रश्नों का कोई सार्वभौमिक “हाँ” या “नहीं” उत्तर नहीं है। यही विवाह और तलाक के प्रश्न की मानवीय जटिलता है।

12. तलाक को “जीत” और “हार” से बाहर निकालना होगा
तलाक के बाद भी दो लोग एक-दूसरे के विरोधी बने रहें—यह आवश्यक नहीं है।
विशेषकर जब बच्चे हों, तो पूर्व पति-पत्नी को एक-दूसरे के प्रति व्यक्तिगत भावनाओं से ऊपर उठकर बच्चों के हित में सहयोग की आवश्यकता हो सकती है।
तलाक के बाद भी गरिमा, निजता, आर्थिक दायित्व, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भावनात्मक सुरक्षा जैसे प्रश्न बने रहते हैं।
इसलिए परिपक्व समाज को तलाक को केवल सामाजिक कलंक या व्यक्तिगत विजय-पराजय के रूप में देखने के बजाय इसे कानून, जिम्मेदारी और मानवीय गरिमा के दायरे में समझना चाहिए।

13. क्या तलाक हमेशा बेहतर विकल्प है?
इस प्रश्न का सार्वभौमिक उत्तर नहीं दिया जा सकता।
किसी विवाह को केवल इसलिए समाप्त करना उचित नहीं कहा जा सकता कि उसमें कठिनाइयाँ हैं। उसी प्रकार केवल इसलिए विवाह को बनाए रखना भी उचित नहीं कहा जा सकता कि समाज तलाक को पसंद नहीं करता।
“बेहतर विकल्प” परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
यदि संबंध में पारस्परिक सम्मान, सुरक्षा, संवाद और सुधार की वास्तविक संभावना है, तो संबंध को सुधारने का प्रयास महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसके विपरीत, यदि संबंध लगातार हिंसा, गंभीर उत्पीड़न, भय, जबरदस्ती या ऐसी परिस्थितियों में बदल गया है जहाँ व्यक्ति की गरिमा और सुरक्षा गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है, तो अलगाव या तलाक सहित उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करना व्यक्ति के अधिकारों और सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है। WHO हिंसा के ऐसे प्रभावों को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और मानवाधिकार चिंता के रूप में रेखांकित करता है।

14. वैश्विक समाज के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण
विवाह संस्था को मजबूत करना और तलाक की आवश्यकता पड़ने पर व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करना—ये दोनों एक-दूसरे के विरोधी उद्देश्य नहीं हैं।
एक स्वस्थ समाज को एक साथ चार बातें स्वीकार करनी होंगी—
पहली, विवाह सम्मान, स्वतंत्र सहमति और समानता पर आधारित होना चाहिए।
दूसरी, विवाह में मतभेद होना अपने आप में विवाह की विफलता नहीं है।
तीसरी, हिंसा और गंभीर उत्पीड़न को “पारिवारिक मामला” कहकर सामान्य नहीं बनाया जा सकता।
चौथी, विवाह-विघटन की स्थिति में भी बच्चों के सर्वोत्तम हित, दोनों पक्षों की गरिमा और लागू कानूनों का सम्मान आवश्यक है।
CEDAW विवाह और उसके विघटन दोनों में समान अधिकारों की अवधारणा को स्वीकार करता है, जबकि बाल अधिकार अभिसमय बच्चों के सर्वोत्तम हित को केंद्रीय विचार बनाता है।

निष्कर्ष: कभी संबंध बचाना बुद्धिमत्ता है, कभी स्वयं को बचाना
विवाह को बचाना अपने आप में कोई नैतिक उपलब्धि नहीं, यदि उसकी कीमत किसी व्यक्ति की सुरक्षा और गरिमा हो। उसी प्रकार तलाक लेना भी अपने आप में स्वतंत्रता या सफलता का प्रमाण नहीं है।
वास्तविक बुद्धिमत्ता इस बात में है कि व्यक्ति परिस्थितियों को ईमानदारी से देख सके।
कभी दो लोगों को अपने अहंकार से ऊपर उठकर विवाह बचाना पड़ता है।
कभी संवाद की कमी को संवाद से दूर करना पड़ता है।
कभी क्षमा संबंध को पुनर्जीवित कर सकती है।
कभी पेशेवर परामर्श और समय संबंध को नया अवसर दे सकते हैं।
और कभी परिस्थितियाँ इतनी गंभीर हो जाती हैं कि अलग होना ही व्यक्ति की सुरक्षा, गरिमा और भविष्य के लिए उपलब्ध महत्वपूर्ण कानूनी विकल्पों में से एक बन जाता है।
इसलिए शायद प्रश्न यह नहीं होना चाहिए कि—
“तलाक सही है या गलत?”
बल्कि अधिक मानवीय प्रश्न यह है—
“इस विशेष परिस्थिति में कौन-सा वैधानिक और जिम्मेदार मार्ग संबंधित व्यक्तियों की गरिमा, सुरक्षा, स्वतंत्रता और बच्चों के सर्वोत्तम हित की सबसे बेहतर रक्षा कर सकता है?”
यही दृष्टिकोण विवाह को भी सम्मान देता है और व्यक्ति की स्वतंत्रता को भी।
और शायद आधुनिक विश्व में तलाक पर सबसे परिपक्व चिंतन यही है—
रिश्ते समाज के लिए नहीं, मनुष्य के लिए होते हैं; इसलिए किसी भी रिश्ते का मूल्यांकन अंततः मनुष्य की गरिमा, सुरक्षा, स्वतंत्रता और पारस्परिक सम्मान के आधार पर होना चाहिए।


संदर्भात्मक अंतरराष्ट्रीय आधार
Universal Declaration of Human Rights, Article 16 — विवाह, विवाह के दौरान और उसके विघटन में समान अधिकार तथा स्वतंत्र एवं पूर्ण सहमति की अवधारणा। (romena.ohchr.org)
Convention on the Elimination of All Forms of Discrimination against Women (CEDAW), Article 16 — विवाह और उसके विघटन में समान अधिकार एवं जिम्मेदारियाँ तथा बच्चों के हितों की प्राथमिकता।
CEDAW General Recommendation No. 29 — विवाह, परिवार संबंधों और उनके विघटन के आर्थिक परिणामों पर विचार।
Convention on the Rights of the Child, Articles 3 and 9 — बच्चे के सर्वोत्तम हित तथा माता-पिता से अलगाव की परिस्थितियों में बच्चे के अधिकार। (UNICEF Global)
World Health Organization — intimate partner violence के स्वास्थ्य, सामाजिक और मानवीय प्रभावों संबंधी वैश्विक साक्ष्य। (World Health Organization)

चेतावनी : यह आलेख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सिद्धांतों पर आधारित चिंतनात्मक लेख है, व्यक्तिगत कानूनी सलाह नहीं। विवाह, तलाक, भरण-पोषण, संपत्ति, अभिरक्षा, घरेलू हिंसा तथा वैवाहिक अधिकारों की वास्तविक कानूनी स्थिति प्रत्येक देश/क्षेत्र के लागू कानून और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करती है। अतः किसी वास्तविक मामले में संबंधित क्षेत्राधिकार के योग्य विधिक विशेषज्ञ से सलाह लेना आवश्यक है। यह संस्करण अंतरराष्ट्रीय पत्रिका/वेब-जर्नल के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित और संतुलित है—किसी धर्म, देश, लिंग, न्यायालय या व्यक्ति को लक्षित नहीं करता और किसी विशिष्ट राष्ट्रीय कानून को सार्वभौमिक नियम के रूप में प्रस्तुत नहीं करता। WHO, UN/CEDAW और UNICEF जैसे प्राथमिक अंतरराष्ट्रीय स्रोतों को आधार बनाया गया है।

बुधवार, सितंबर 23, 2026

लेखक, विचारक, दार्शनिक और पुलिस ऑफिसर श्री हुलेश्वर प्रसाद जोशी ने पुलिस विभाग में अपनी उत्कृष्ट सेवा के 21 साल किये पुरे; 22वें वर्ष में प्रवेश करते हुए अपने आदर्शो और सहयोगियों सहित पत्रकारों और मीडिया बंधुओं का आभार

लेखक, विचारक, दार्शनिक और पुलिस ऑफिसर श्री हुलेश्वर प्रसाद जोशी ने पुलिस विभाग में अपनी उत्कृष्ट सेवा के 21 साल किये पुरे; 22वें वर्ष में प्रवेश करते हुए अपने आदर्शो और सहयोगियों सहित पत्रकारों और मीडिया बंधुओं का आभार

व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी माना रायपुर में प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ जवान श्री हुलेश्वर प्रसाद जोशी की सेवा का 21 वर्ष पूर्ण; 22वें वर्ष पर प्रवेश करने पर उन्होंने अपने आदर्शो और सहयोगियों सहित पत्रकारों और मीडिया बंधुओं का आभार प्रकट करते हुए अपने पुलिस जीवन में प्रेरणा स्त्रोत, मार्गदर्शकों और सहयोगियों का नाम अमिट स्याही में लिखने का प्रयास किया है।

श्री जोशी ने कहा है कि पुलिस विभाग में मैंने अपने विभागीय अनुशासन को पूर्ण करते हुए पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी के साथ अव्वल दर्जे के सेवा के दौरान आप सभी से प्राप्त आशीर्वाद, मार्गदर्शन, सहयोग, सम्मान और प्रेम के लिए कोटिशः आभार। 21वर्ष के दीर्घकालीन सेवा के दौरान मेरी अनुभव और कार्यक्षमता में निरंतर वृद्धि हुई है, इसका तात्पर्य है कि मैंने लगभग Zero से शुरुआत के साथ दर्जनों छिटपुट गलतियों और आपके क्षमादान के साथ आज इस identity को प्राप्त कर पाया हूं तो उसके पीछे आप सबका सराहनीय योगदान रहा है।

श्री जोशी जी के प्रेरणास्रोत : विशेष डीजीपी श्री जीपी सिंह, आरक्षक श्री जय डहरिया, रिटायर्ड कंपनी कमांडर श्री अशोक चतुर्वेदी, पुलिस अधीक्षक श्री मोहित गर्ग, पुलिस अधीक्षक श्री गिरिजा शंकर जायसवाल, एसपी श्री रोबिनसन गुड़िया, सेनानी एम. तुङ्गोई, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चंद्राकर, सहायक सेनानी श्री रविप्रताप सिंह, रिटायर्ड सहायक सेनानी श्री धर्मनाथ सिंह, सहायक सेनानी श्री टीका राम कुर्रे, भूतपूर्व कंपनी कमांडर श्री सत्यनारायण शुक्ला, भूतपूर्व कंपनी कमांडर श्री सरजू सिंह सिकरवार, एपीसी श्री शैवाल चटर्जी, एपीसी श्री जयंत पॉल को सादर प्रणाम।

श्री जोशी जी के मार्गदर्शक : सहायक सेनानी श्री कुंजराम चौहान, सहायक सेनानी श्री लोकेश्वर शांडिल्य, सहायक सेनानी श्री गोविन्द राम मिंज, सहायक सेनानी श्री विजय तिर्की, Ret.CC श्री अशोक चतुर्वेदी, रक्षित निरीक्षक श्री दीपक कुमार साव, रक्षित निरीक्षक श्री सोनू वर्मा, CC श्री सुरित राम बघेल, CC श्री नरसिंह यादव, PC श्री हरीश चंद्र सिन्हा, APC स्वर्गीय श्री ओंकार नाथ सिंह, PC श्री पंकज तिवारी, PC श्री चंद्रमा राम, Steno श्री पवन नामदेव, ASI श्री नीलकमल दिवाकर, APC श्री महेंद्र शर्मा, APC श्री रामा साहू, HC श्री गोविन्द बिहारी शर्मा, श्री निर्मल बारमते, श्री संजय खांडेकर, को सादर प्रणाम।

विशेष आभार : भूतपूर्व डीआईजी श्री एनकेएस ठाकुर, भूतपूर्व आईजी श्री के.सी. अग्रवाल, भूतपूर्व डीआईजी श्री जगमोहन वट्टी, सेनानी श्री नरेंद्र खरे, भूतपूर्व एसी श्री पासवान सर, एसी श्री त्रिभुवन मोहन वासनिक, सीसी श्री नरसिंह यादव, श्री सीसी श्री जितेंद्र कोरी, अकाउंटेंट श्री मनिहार सिंह सहारे, अकाउंटेंट श्री मुरली रावते, स्टेनो श्री संतोष देहारी, SI - M श्री राजेश दुरुक्कर, ASI श्री जितेन्द्र राजपूत, Asi-M श्री महेश बंजारे, श्री श्रीधर सिंह बैस, श्री लाल मोहन पटेल, श्री सुदर्शन गुप्ता, श्री धनंजय हिरवानी, श्री राकेश साव, श्री अनिल जोशी, श्री दिवाकर मिश्रा, श्री रोहित अग्निहोत्री, श्री अनिल तिवारी, श्री तुकाराम साहू, श्री भानु प्रकाश मारकंडे, श्री श्यामचरण मुंडा, श्री अवधेश तिवारी, श्री गजेंद्र सिंह कुशवाहा, श्री शिव सोनवानी, श्री नरेन्द्र कुशवाहा, श्री रोशन दुबे, श्री कमल किशोर द्विवेदी, श्री दिनेश चंद्राकर, श्री सत्यप्रकाश भारद्वाज, श्री मनोज शर्मा, श्री महेंद्र हंश, श्री अनिल यादव, श्री सुनील सहगल, श्री रामस्वरूप सोनवानी, श्री परमेश्वर निषाद, श्री जितेन्द्र कुमार पटेल, श्री लोमन सिंह रावते, श्री राकेश ताम्रकार, श्री जय वासनिक, श्री जगदेव नेताम, श्री कन्हैया वैष्णव, श्री खिलेश्वर बेसरा, श्री भीमसिंह कुमेटी, सहित सभी वरिष्ठ एवम सहयोगी पुलिस अधिकारीगण का आभार प्रकट करता हूँ। आदरणीय पाठकों, उपरोक्तानुसार दर्शाए नाम के अलावा भी बहुत से लोगों ने मेरी सेवा के दौरान अपना अहम किरदार निभाया है उन सबको भी बहुत बहुत धन्यवाद।

आदरणीय/आदरणीया
मैंने अपनी 21 साल की सेवा के दौरान 5वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल कांगोली जगदलपुर, व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी माना रायपुर और जिला पुलिस बल नारायणपुर में पदस्थ होकर थाना जांगला (जिला बीजापुर), थाना कोरर (जिला कांकेर), CIATS जगदलपुर, 4th BN CAF माना रायपुर, पुलिस मुख्यालय (व्हीआईपी सुरक्षा सेल, चुनाव सेल, तकनीकी सेवाएं शाखा, सिटीजन कॉप सेल), आईजी रेंज रायपुर, आईजी रेंज दुर्ग, Directorate EOW Raipur और राज्य पुलिस अकादमी चंद्रखूरी में कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त किया है। इस दौरान संबंधित कार्यालयों के स्टाफ से भी मुझे बेहतर मार्गदर्शन और सहयोग के साथ साथ पद की गरिमा से बढ़कर मुझे सम्मान प्राप्त हुआ है, इसके लिए सभी स्टॉफ को बहुत बहुत धन्यवाद.....

पुलिस बल में सेवा के दौरान पुलिस विभाग के अच्छे कार्यों को जन मानस तक पहुंचने में छत्तीसगढ़ राज्य के अलावा देश के अनेकोनेक बुद्धिजीवी पत्रकारों, मीडिया साथियों का भी निरंतर सहयोग प्राप्त हुआ है, अतः आप सभी पत्रकार और मीडिया साथियों का विशेष आभार प्रकट करता हूं।

मेरी इस उत्कृष्ट सेवा में मेरे दादा, दादी, मां, बाबूजी, बड़े भैया, भाई, छोटी बहन, पत्नी और नन्हें बच्चों के अलावा बहुत से पारिवारिक सदस्यों और मित्रों का बलिदान और मार्गदर्शन भी शामिल है आप सबको सादर प्रणाम...... अपेक्षा है आप सबका सहयोग निरंतर प्राप्त होता रहेगा।

: जीवन की अनमोल कहानी :
अधिवक्ता श्री देव प्रसाद जोशी : आपने सेवा में आने के लिए और आने के पहले बचपन से ही सदैव गुरु और कष्टमुक्तिदाता बनकर मेरे लिए सैकड़ों उपकार किया। मुझे कुएं मे डूबकर मरने से बचाया; कंप्यूटर सिखाया; ऑफिसियल कार्य सिखाया; आप मेरे बड़े भैया से अधिक मेरे असली गुरु हैं।

आरक्षक श्री जय डहरिया : जीजू, आपने मेरे पिताश्री को छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में सेवा के फायदे बताकर 11 वीं बटालियन आईआर भर्ती में फॉर्म भरने के लिए मनाया।

रिटायर्ड कंपनी कमांडर श्री अशोक चतुर्वेदी : आपने वर्ष 2005 में जब मुझे दूसरी बटालियन सकरी में भर्ती (शारीरिक दक्षता परीक्षा) के दौरान 100 मीटर दौड़ में फैल कर दिया गया; तब मैं हार मानकर घर की ओर रुख कर दिया था। आपने मेरे चेहरे के भाव से मेरा व्यक्तित्व और भविष्य पहचानकर मुझे अपना छोटा भाई माना और मेरा मार्गदर्शन किया। आप मेरी जिंदगी में भगवान बनकर आए और मेरे जीवन को एक बेहतर स्वरूप दी।

सहायक सेनानी श्री कुंजराम चौहान : आपने सेवा के दौरान भी शिक्षा अध्ययन जारी रखने के लिए मुझे प्रेरित किया; इसके साथ ही आपने पुलिस विभाग में कार्यालयीन कार्य करने की सीख और अवसर प्रदान किया।

निरीक्षक जगदीश पाणिग्रही : आपने मुझे मेरी छोटी-बड़ी गलतियों पर मुझे कटु शब्दों में समझाईस देकर भी परफेक्ट बनाया; आपने ही मुझे लेपटॉप खरीदने की सलाह दी थी। लेपटॉप खरीदने के बाद से मेरी ख्याति में वृद्धि हुई।

रिटायर्ड सहायक सेनानी श्री धर्मनाथ सिंह : आपने मेरी योग्यता और दक्षता का सराहना करते हुए मुझे सम्मानजनक जीवन का अवसर प्रदान किया।

विशेष डीजीपी श्री जीपी सिंह : आपने मुझे पुलिस विभाग में उत्कृष्ट सेवा करने के तरीके सिखाए हैं, आपने कार्यों को समय-सीमा में भीतर जीरो गलती के साथ तत्परता पूर्वक कार्य पूर्ण करने, और निर्भय होकर सीनियर अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने की साहस और हिम्मत दी। आपने मुझे रैंक से अधिक जिम्मेदारी देकर दक्ष पुलिस अधिकारी बनाया। मैं अपने इस पूरे जीवन तक आपके स्नेह, सद्भावना और आशीर्वाद के लिए कृतज्ञ रहूँगा।

भवदीय
(हुलेश्वर प्रसाद जोशी)
प्रधान आरक्षक
व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर




व्यक्तिगत जानकारी:-

1. नाम – श्री हुलेश्वर प्रसाद जोशी
2. पिता का नाम - श्री शैल कुमार जोशी
3. माता का नाम - श्रीमती मोतिम बाई
4. पत्नी का नाम - श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी
5. पदनाम एवं बैज नंबर - प्रधान आरक्षक 159,
6. वर्तमान पद्स्थापा इकाई का नाम - व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर
7. जन्मतिथि - 09.09.1984
8. प्रथम नियुक्ति - आरक्षक-जीडी, दिनांक 23.09.2005 (5वीं वाहिनी छसबल, जगदलपुर)
9. पदोन्नति - प्रधान आरक्षक-जीडी, दिनांक 12.03.2019 (व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर)
10. मूल निवास का पता - ग्राम- मनकी, पोस्ट ऑफिस- साल्हेघोरी, तहसील-लोरमी, जिला मुगेली।
11. मोबाईल नंबर - 9826164156, 9406003006
12. ई-मेल आईडी – hp.joshi@gov.in

कार्यस्थल (पदस्थापना) की जानकारी:-

1. 5वीं वाहिनी छसबल, जगदलपुर
2. व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर
3. जिला पुलिस बल, जिला नारायपुर
4. व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर


कार्यस्थल (संबद्धता/मौखिक आदेश पर) की जानकारी:-

1. सीआईएटी स्कूल, जगदलपुर
2. व्हीआईपी सुरक्षा सेल, पुमु
3. राज्य चुनाव सेल, पुमु
4. सिटीजन कॉप सेल, आईजी रेंज, रायपुर
5. तकनीकी सेवाएं शाखा, पुमु
6. सिटीजन कॉप/चुनाव सेल, आईजी रेंज, दुर्ग
7. सीसीटीएनएस शाखा, ईओडब्ल्यू
8. राज्य पुलिस अकादमी, चन्दखुरी



शैक्षणिक योग्यताएं:-

1. बैचलर ऑफ आर्ट्स – गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर
2. मास्टर ऑफ आर्ट्स (शिक्षा शास्त्र) – मैट्स विश्वविद्यालय, आरंग-रायपुर।
3. मास्टर ऑफ आर्ट्स (अर्थशास्त्र) – बस्तर विश्वविद्यालय, जगदलपुर।
4. पीजीडीसीएपी – मैट्स विश्वविद्यालय, आरंग-रायपुर।
5. मानव अधिकार में प्रमाण पत्र – इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, दिल्ली।
6. डीसीएपी – एम. टेक कम्प्यूटर एजूकेशन सेंटर
7. मेडिकल लेबोरेटरी टेक्निशियन – भारत सेवक समाज



प्रकाशित ग्रंथ/किताब:-

1. लिख दूं क्या? – काव्य संग्रह
2. मानव अधिकार के अनछूए पहलू



कुछ महत्वपूर्ण कार्य

2005 प्रथम नियुक्ति - दिनांक 23.09.2005 को 5वीं वाहिनी छसबल, कंगोली-जगदलपुर में आरक्षक (जीडी) के पद पर नियुक्त हुआ। इस दौरान ई कंपनी कैम्प, थाना जांगला (जिला बीजापुर) एवं थाना कोरर (जिला कांकेर) में तैनात रहा।

2006 बुनियादी प्रशिक्षण - एपीटीएस, माना-रायपुर में दिनांक 01.03.2006 से 30.09.2006 तक बुनियादी प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रथम श्रेणी के साथ सफलता अर्जित किया।

2006 कोरियन कराटे प्रशिक्षण - एपीटीएस, माना-रायपुर में बुनियादी प्रशिक्षण के दौरान दिनांक 20.06.2006 से 30.09.2006 तक मार्शल आर्ट्स की प्रशिक्षण प्राप्त किया।

2008 सीआईएटी कोर्स, असम 4कोर हरचुरा (असम) में सीआईएटी प्रशिक्षण प्राप्त किया।

2010-12 सीआईएटी स्कूल में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन - सीआईएटी स्कूल में कम्प्यूटर ऑपरेटर एवं कार्यालय सहायक के रूप में तैनात होकर महत्वपूर्ण योगदान देते हुए महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।

2012-13 स्थानीय छसबल बटालियन एवं आईआर बटालियन भर्ती में योगदान - छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार पुलिस मुख्यालय द्वारा स्थानीय बटालियन एवं आईआर बटालियन भर्ती वर्ष 2012-13 में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अंतर्गत 4थी वाहिनी छसबल अंतर्गत आवेदन पत्र का संकलन, स्कैनिंग एवं भर्ती ड्यूटी किया।

2013-2015 व्हीआईपी सुरक्षा सेल मंे महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन - (11/06/2013 से 14/10/2015) पुलिस मुख्यालय रायपुर में गठित व्हीआईपी सुरक्षा सेल में तैनात होकर अतिमहत्वपूर्ण व्यक्तियों/ महत्वपूर्ण व्यक्तियों /राजनैतिक व्यक्तियों/ जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक/ न्यायिक अधिकारियों और राज्य के पत्रकारों, व्हिसिल व्लोवरों सहित आम नागरिकों कों सफलतापूर्वक सुरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान देने के साथ-साथ पीएसओ बुकलेट प्रकाशन एवं व्हीआईपी सुरक्षा बटालियन के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया।
सुरक्षा के अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि -
ऽ बलिदानी माटी कलस यात्रा।
ऽ परिवर्तन यात्रा।
ऽ विकास यात्रा।

2014-2015 व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी के गठन में महत्वपूर्ण योगदान - पुलिस महानिरीक्षक, सुरक्षा/ योप्र/रेंज के नेतृत्व में व्हीआईपी सुरक्षा के तहत माननीय मुख्यमंत्री, माननीय राज्यपाल, माननीय हाईकोर्ट, छग भवन/सदन एवं अन्य महत्वपूर्ण/सुरक्षा श्रेणी प्राप्त व्यक्तियों की सुरक्षा हेतु पूर्व से शासन स्वीकृत बलों से व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर का गठन पूर्ण कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2013-2015 विभिन्न पीएसओ कोर्स/पीएसओ रिफ्रेसर कोर्स के संचालन में सहयोग - तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक, सुरक्षा के निर्देशानुसार विभिन्न पीएसओ रिफ्रेसर कोर्स एवं पीएसओ कोर्स कराया गया। प्रशिक्षणार्थियों को छग में पहली बार प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र देकर उनके सेवापुस्तिका में इन्द्राज कराया गया। उक्त कार्यों में आईजी महोदय के अधीन कार्यालय सहायक के रूप में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।

2014-2015 पीएसओ मार्गदर्शिका के प्रकाशन एवं वितरण में योगदान - पुलिस महानिरीक्षक, सुरक्षा के निर्देशानुसार 3000 नग पीएसओ मार्गदर्शिका का प्रकाशन कराते हुए व्हीआईपी सुरक्षा में तैनात पीएसओ को वितरित कराया गया उक्त कार्यों के संपादन हेतु महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। ।

2013-2015 राज्य निर्वाचन सेल में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन - पुलिस मुख्यालय रायपुर में गठित राज्य निर्वाचन सेल में तैनात होकर कार्य किया। इस दौरान:-
ऽ विधान सभा आम निर्वाचन-2013
ऽ लोक सभा आम निर्वाचन-2014
ऽ नगरीय निकायों के आम निर्वाचन-2014
ऽ एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आम निर्वाचन-2015
में संलग्न तैनात होकर महत्वपूर्ण योगदान देते हुए जीरो-इंसिडेंट के लक्ष्य को हासिल करने हेतु महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।

2013 विधान सभा आम निर्वाचन-2013 का संपादन - पुलिस मुख्यालय रायपुर में गठित राज्य निर्वाचन सेल में तैनात होकर विधान सभा आम निर्वाचन-2013 को निष्पक्ष, निर्विध्न एवं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।

2013 IPL 7 क्रिकेट मैच के आयोजन में सहयोग – दिनांक 28.04.2013 एवं 01.05.2013 को रायपुर स्थित शहीद वीरनारायण सिंह अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम परसदा, रायपुर को सुरक्षा प्रदान करते हुए शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

2014 चैम्पियन लीग क्रिकेट मैच के आयोजन में सहयोग – दिनांक 19.09.2014 एवं 23.09.2014 को रायपुर स्थित शहीद वीरनारायण सिंह अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम परसदा, रायपुर में शांतिपूर्ण आयोजन को सुरक्षा प्रदान करते हुए शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

2014 लोक सभा आम निर्वाचन-2014 का संपादन - पुलिस मुख्यालय रायपुर में गठित राज्य निर्वाचन सेल में तैनात होकर लोक सभा आम निर्वाचन-2014 को निष्पक्ष, निर्विध्न एवं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।

2014 नगरीय निकायों के आम निर्वाचन-2014 का संपादन - पुलिस मुख्यालय रायपुर में गठित राज्य निर्वाचन सेल में तैनात होकर नगरीय निकायों के आम निर्वाचन-2014 को निष्पक्ष, निर्विध्न एवं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।

2015 IPL 8 क्रिकेट मैच के आयोजन में सहयोग - दिनांक 09.05.2015 एवं 12.05.2015 को रायपुर स्थित शहीद वीरनारायण सिंह अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम परसदा, रायपुर में आयोजित मैच को सुरक्षा प्रदान करते हुए शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

2015 विश्व हाकी लीग प्रतियोगिता के आयोजन में सहयोग – दिनांक 27.11.2015 से 06.12.2015 तक रायपुर सांइस कालेज स्थित अन्तर्राष्ट्रीय हांकी स्टेडियम में विश्व हाकी लीग प्रतियोगिता के आयोजन को सुरक्षा प्रदान करते हुए शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

2015 चैम्पियन टेनिस लीग के आयोजन में सहयोग – दिनांक 01.12.2015 एवं 02.12.2015 को रायपुर स्थित इन्डोर स्टेडियम में आयोजित चैम्पियन टेनिस लीग को सुरक्षा प्रदान करते हुए शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

2015 नवनिर्मित जैतखाम का लोकार्पण में सहयोग – दिनांक 18.12.2015 को गिरौधपुरी धाम में नवनिर्मित जैतखाम का लोकार्पण माननीय मुख्यमंत्री छ0ग0शासन के दौरान सुरक्षा प्रदान करते हुए शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

2015 स्थानांतरण पर व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर कार्यभार - वर्ष-2015 में 5वीं वाहिनी छसबल, जगदलपुर से स्थानांतरण पर व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर कार्यभार ग्रहण किया।

2015 त्रिस्तरीय पंचायतों के आम निर्वाचन-2015 का संपादन - पुलिस मुख्यालय रायपुर में गठित राज्य निर्वाचन सेल में तैनात होकर त्रिस्तरीय पंचायतों के आम निर्वाचन-2015 को निष्पक्ष, निर्विध्न एवं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।

2015-2020 सिटीजन कॉप - मोबाईल एप्प के क्रियान्वयन एवं संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका -पुलिस महानिरीक्षक, रायपुर रेंज, रायपुर के अंतर्गत गठित सिटीजन कॉप सेल में तैनात होकर महत्वपूर्ण योगदान देते हुए महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। यह मोबाईल एप्प रायपुर एवं दुर्ग संभाग के सभी जिलों के साथ ही जिला मुंगेली में लागू किया गया था। इस एप्प के लगभग 1.35 लाख से अधिक यूजर्स थे। इस एप्प के माध्यम से लगभग 500 से अधिक गुम/चोरी मोबाईल को रिकवर कर मूम मालिक को सौपने में सहयोग प्रदान किया तथा आम लोगो की लगभग 75,00 से अधिक शिकायतों पर कार्यवाही करने में अपना योगदान दिया।

2015 सिटीजन कॉप - मोबाईल एप्प को Federation of India Chambers of Commerce and Industry (FICCI) New Delhi द्वारा 05.05.2015 को Smart Policing Award – 2016 से सम्मानित किया गया। सिटीजन कॉप - मोबाईल एप्प के सफल क्रियान्वयन, संचालन, एवं शिकायतों के निराकरण में अहम भूमिका का निर्वहन किया गया।

2015 नेशनवाइड इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम डायल-112 का राज्य में स्थापना एवं संचालन में सहयोग - पुलिस महानिदेशक, छग के दिनांक 21/09/2015 के माध्यम से एनईआरएस के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित कॉल, ग्लोबल पोजिशिनिंग सिस्टम आधारित पुलिस वाहन तथा एकीकृत कम्प्यूटर प्रेषण व 112 नंबर की स्थापना के लिए पुलिस महानिरीक्षक श्री जी.पी. सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इस दौरान नोडल अधिकारी के अधीन कार्यालय सहायक के रूप में कार्य करते हुए आवश्यक भूमिकाओं का निर्वहन किया।

2016 The Digital India Conclave – Digital Trailblazers Award - सिटीजन कॉप - मोबाईल एप्प को इंडिया टूडे व एचपी के माध्यम से दिनांक 27.05.2016 को The Digital India Conclave – Digital Trailblazers Award से सम्मानित किया गया। सिटीजन कॉप - मोबाईल एप्प के सफल क्रियान्वयन, संचालन, एवं शिकायतों के निराकरण में अहम भूमिका का निर्वहन किया गया।

2016 Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) Govt of India द्वारा दिनांक 19-12-2016 को Digital India Awards – 2016 सम्मानित किया गया। सिटीजन कॉप - मोबाईल एप्प के सफल क्रियान्वयन, संचालन, एवं शिकायतों के निराकरण में अहम भूमिका का निर्वहन किया गया।

2016 IPL9 क्रिकेट मैच के आयोजन में सहयोग – दिनांक 20.05.2016 एवं 22.05.2016 को रायपुर स्थित शहीद वीरनारायण सिंह अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम परसदा, रायपुर को सुरक्षा प्रदान करते हुए शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

2017 पीएसओ प्रशिक्षण - व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी द्वारा आयोजित पीएसओ प्रशिक्षण सत्र - 03 में शामिल होकर सफलता अर्जित किया।

2018 सिटीजन कॉप मोबाईल एप्प के अपग्रेटेड वर्जन की शुभारंभ एवं क्रियान्वयन में विशेष योगदान - तत्कालीन पुमनि दुर्ग के विशेष प्रयास के फलस्वरूप दिनांक 29/03/2018 को कलेक्टोरेट दुर्ग सभागृह में माननीय मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह द्वारा सिटीजन कॉप मोबाईल एप्प के अपग्रेटेड वर्जन का शुभारंभ किया गया, जिसमें विशेष योगदान देते हुए रेंज स्तरीय सिटीजन कॉप सेल के कार्यान्वयन में हिस्सा लेकर एप्प के सफल संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2018 विधान सभा आम निर्वाचन-2018 के संपादन में महत्वपूर्ण योगदान - पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय दुर्ग में तैनाती के दौरान संभाग स्तरीय चुनाव सेल में कार्य करते हुए विधान सभा आम निर्वाचन-2018 को शांतिपूर्ण संपन्न कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2018 विभागीय कैडर कोर्स - व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी द्वारा आयोजित कैडर कोर्स में शामिल होकर सफलता अर्जित किया।

2019 प्रधान आरक्षक के पद पर पदोन्नति - दिनांक 12 मार्च 2019 को व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर में प्रधान आरक्षक (जीडी) के पद पर कार्यभार ग्रहण किया।

2019 लोकसभा आम निर्वाचन 2019 में महत्वूर्ण भूमिका का निर्वहन - व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर के स्थापना शाखा में तैनाती के दौरान अपने कार्य के साथ-साथ लोकसभा आम निर्वाचन 2019 में महत्वूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। मेरे द्वारा व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर में पदस्थ एवं राज्य भर के प्रोटेक्टियों की सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारियों/निज सुरक्षा अधिकारियों को बैलेट पेपर के माध्यम से मतदान कराने में उल्लेखनीय योगदान दिया।

2019 CCTNS COREApplication Implementation - राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में तैनाती के दौरान ईओडब्ल्यू में CCTNS CORE Application को Implementation कराने में महत्वूपर्ण भूमिका का निर्वहन किया।

2019 सिटीजन कॉप - मोबाईल एप्प का बीपीआरएण्डडी में प्रजेंटेशन देने में महत्वपूर्ण योगदान - One Nation One App के तहत छत्तीसगढ़ पुलिस के मोबाइल एप्पलीकेशन सिटीजन कॉप को देशभर में लागू करने हेतु 2nd कॉन्फ्रेंस ऑन नेशनल पुलिस मिशन के माइक्रो मिशन- 03 मे कम्युनिकेशन एवं टेक्नोलॉजी कैटेगरी के तहत, दिनांक 07.02.2019 को आईजी श्री जी पी सिंह के द्वारा बीपीआरएंडडी नई दिल्ली में दिया प्रजेंटेशन दिया गया, जिसके माध्यम से सिटीजन कॉप को पूरे देशभर में लागू करने हेतु चयनित किया गया। इस कार्य में मेरे द्वारा श्रीमान् आईजी महोदय के निर्देशानुसार कार्य करते हुए उनके साथ इस कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2013-2020 विभिन्न वर्कशॉप/प्रशिक्षण में योगदान - पुलिस महानिरीक्षक श्री जी.पी. सिंह के निर्देशानुसार समय-समय पर विभिन्न विषयों पर पुलिस बल के कार्यदक्षता में वृद्धि एवं आम नागरिकों मंे अपराध के नियंत्रण संबंधी रोकथाम के लिए निम्नानुसार कार्यशाला/ प्रशिक्षण आयोजित कराया गया।
1. Workshop on Bank Frauds; Prevention and Investigation विषय पर दिनांक 29.11.2013 को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन वृन्दावन सभागृह, रायपुर में किया गया, जिसमें राज्य भर के 88 राजपत्रित पुलिस अधिकारियों सहित लगभग 200 निरी/उनि को प्रशिक्षित किया गया।
2. साईबर अपराध नियंत्रण पर राज्य स्तरीय वर्कशॉप पुलिस ट्रांजिट मेस, रायपुर में आयोजित की गई। इस कार्यशाला में श्री इशांत सिन्हा, साईबर एक्सपर्ट द्वारा पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों को साईबर अपराध से जूडे जानकारी से अवगत कराया गया।
3. सिटीजन कॉप - मोबाईल एप्लीकेशन को चरणवार बिलासपुर एवं दूर्ग संभाग में लागू करने दिनांक 12/02/2016 को पुलिस ट्रांजिट मेस, रायपुर में वर्कशॉप आयोजित की गई।
4. Stress Management आधुनिक जीवन शैली में काम के असीमित घण्टे के फलस्वरूप पुलिस अधिकारियों एवं जवानों को तनावमुक्ति के लिए दिनांक 09/01/2015 को कास्मिक विजन रिसोर्सेज प्रा.लि. संस्था के सहयोग से एक दिवसीय वर्कशॉप आयोजित किया गया।
5. ट्रैफिक नियंत्रण पर वर्कशॉप।
6. रायपुर संभाग के विभिन्न स्कूल, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों एवं रामकृष्ण केयर हास्पिटल, रायपुर में अपराध के रोकथाम और सिटीजन कॉप - मोबाइल एप्लीकेशन के उपयोगिता संबंधी 25 से अधिक वर्कशॉप/प्रशिक्षण आयोजित कर जन जागरूकता लाया गया। सिटीजन कॉप संबंधी कार्यशाला संबंधित संस्थान में ही आयोजित किये गये। प्रतिभागियों को श्री जितेन्द्र कोरी, श्री हुलेश्वर जोशी, श्री दिवाकर मिश्रा एवं युथ फेडरेशन रायपुर के अध्यक्ष श्री दिपेश मिश्रा द्वारा जागरूक किया गया।
7. दिनांक 30/09/2015 को पुलिस ट्रांजिट मेस रायपुर में बैंक/एटीएम/क्रेडिट कार्ड के धोखाधडी विषय पर 01 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन एक्सिस बैक के एक्सपर्ट के माध्यम से कराया गया।
8. मानव तस्करी पर कार्यशाला - शक्तिवाहिनी रायपुर के एक्सपर्ट के सहयोग से पुलिस ट्रांजिट मेस रायपुर में कार्यशाला आयोजित किया गया।
9. वर्ष-2020 में पुलिस ऑफिसर मेस में ईओडब्ल्यू के द्वारा फारेंसिंक साईंस पर आयोजित कार्यशाला में हिस्सा लेकर भागीदारी का निर्वहन किया।

2020 जिला पुलिस बल, नारायणपुर स्थानांतरण पर कार्यभार ग्रहण - पुलिस मुख्यालय, रायपुर के आदेशानुसार व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर से जिला पुलिस बल, जिला नारायणपुर में स्थानांतरण पर कार्यभार ग्रहण किया। इस रक्षित केन्द्र नारायणपुर में रीडर के रूप में कार्य किया तथा थाना एडका में पदस्थ हुआ।

2021 अबूझमाड़ हॉफ पीस मैराथन-2021 के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - जिला पुलिस बल नारायणपुर एवं जिला प्रशासन के द्वारा जन सहयोग से सीएसआर मद के अंतर्गत अबूझमाड़ हॉफ पीस मैराथन-2021 के आयोजन एवं मैराथन के प्रमोशन हेतु आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2021 बस्तर फाईटर्स भर्ती एवं उप निरीक्षक भर्ती पूर्व आयोजित प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - जिला पुलिस बल नारायणपुर द्वारा डीएफएम मद अंतर्गत सहयोग से संचालित आरक्षक (बस्तर फाईटर्स) भर्ती एवं उप निरीक्षक भर्ती पूर्व आयोजित प्रशिक्षण में प्रशिक्षण प्रभारी के रूप में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। इसके अंतर्गत लगभग 1200 से अधिक युवक युवतियों को फिजिकल अभ्यास एवं लिखित परीक्षा की निःशूल्क तैयारी कराया गया।

2021 हिन्दी - गोण्डी संक्षिप्त शब्दकोश का पुनः प्रकाशन एवं वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - नारायणपुर पुलिस द्वारा संग्रहित ‘‘हिन्दी - गोण्डी संक्षिप्त शब्दकोश’’ के द्वितीय संशोधित संस्करण नवंबर 2021 का प्रकाशन करते हुए जिला के 1000 युवाओं को निःशूल्क वितरण हेतु महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2021 अंतर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह पर नाटक ‘‘दसरी’’ का मंचन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - अंतर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह पर नाटक ‘‘दसरी’’ का मंचन कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया। जिला प्रशासन, नारायणपुर द्वारा आयोजित मावली मेला स्थल में दिनांक 12/03/2021 को नाटक ‘‘दसरी’’ का मंचन किया गया। यह नाटक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चंद्राकर और सुश्री आरती गर्ग के कॉन्सेप्ट पर आधारित तथा श्री हुलेश्वर जोशी द्वारा रचित है। नाटक ‘‘दसरी’’ का मंचन जिला पुलिस बल द्वारा सामाजिक संस्था नव संचार फाउण्डेशन और करूणा फाउण्डेशन के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह पर थीम ‘सुपोषित महिला, खुसहाल परिवार’ के तहत किया गया।

2023 रक्तदान शिविर के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - नारायणपुर पुलिस द्वारा दिनांक 28.03.2023 को सामुदायिक पुलिसिंग के तहत् आयोजित रक्तदान शिविर के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हुए स्वयं के साथ-साथ 30पुलिस जवानों एवं परीयना प्रशिक्षणार्थियों से रक्तदान कराने में योगदान दिया।

2023 “ऐ नारी” नाटक का मंचन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - नारायणपुर पुलिस द्वारा ‘‘अभिव्यक्ति जागरूकता कार्यक्रम’’ एवं ‘‘हमर बेटी, हमर मान कार्यक्रम’’ के तहत संचालित महिला जागरूकता सप्ताह के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया इसदौरान दिनाँक 19-03-2023 को समापन समारोह के दौरान जिला प्रशासन एवं नारायणपुर पुलिस द्वारा संचालित परीयना -प्रशिक्षण के प्रशिक्षु युवतियों एवं युवकों ने मेरे द्वारा लिखित/निर्देशित नाटक ‘‘एै नारी’’ का मंचन करते हुए कार्यक्रम में सम्मिलित महिलाओं को महिलाओं को जागरूकता किया गया।

2023-24 ‘‘परीयना प्रशिक्षण’’ अंतर्गत सेना, सशस्त्र बल और पुलिस में भर्ती के लिए 286 युवाओं को निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान करने में महत्वूपर्ण भूमिका का निर्वहन - जिला नारायणपुर में जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग के तत्वाधान में ‘‘परीयना’’ प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया गया। मेरे रक्षित निरीक्षक के नेतृत्व में मेरी टीम के द्वारा जिसमें जिले के युवक- युवतियों को सेना, सशस्त्र बल और पुलिस में भर्ती के लिए निःशुल्क शारीरिक अभ्यास एवं लिखित परीक्षा का प्रशिक्षण दिया गया। इस योजनान्तर्गत जिले के कुल 286 युवक-युवतियों को 3-3 माह का शारीरिक एवं लिखित परीक्षा का प्रशिक्षण दिया गया।

2025 - अबूझमाड़ हॉफ पीस मैराथन-2025 के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - जिला पुलिस बल नारायणपुर एवं जिला प्रशासन के द्वारा जन सहयोग से सीएसआर मद के अंतर्गत अबूझमाड़ हॉफ पीस मैराथन-2025 के आयोजन एवं मैराथन के प्रमोशन हेतु आयोजित दर्जनों बड़े कार्यक्रमों के आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2026 अबूझमाड़ हॉफ पीस मैराथन-2026 के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - जिला पुलिस बल नारायणपुर एवं जिला प्रशासन के द्वारा जन सहयोग से सीएसआर मद के अंतर्गत अबूझमाड़ हॉफ पीस मैराथन-2026 के आयोजन एवं मैराथन के प्रमोशन हेतु आयोजित दर्जनों बड़े कार्यक्रमों के आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2020-26 अबूझमाड़ को नक्सल मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - जूलाई 2020 से मई 2026 तक जिला पुलिस बल नारायणपुर में पदस्थापना के दौरान रक्षित निरीक्षक के रीडर के रूप में तैनात रहा।
ऽ जिला नारायणपुर में तैनाती के दौरान लगभग 45 नवीन जन सुविधा एवं सुरक्षा कैम्प स्थापित करने हेतु प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लॉजिस्टिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने में योगदान दी गई।
ऽ नक्सल उन्मूलन के अंतर्गत 50 से अधिक नक्सली शव बरामद करने हेतु लॉजिस्टिक सहयोग प्रदान करने हेतु प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लॉजिस्टिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने में योगदान दी गई।
ऽ नक्सल उन्मूलन हेतु प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से नारायणपुर पुलिस की उपलब्धियों को प्रचारित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2025-26 आई-गॉट कर्मयोगी प्लेटफार्म में ऑनबोर्डिंग एवं प्रशिक्षण कराने में महत्वपूर्ण योगदान - जिला पुलिस बल, नारायणपुर में तैनाती के दौरान जिला के शतप्रतिशत पुलिस अधिकारियों एवं जवानों को आरक्षक-डीएसएफ श्री कमलेश साहू के सहयोग से आई-गॉट कर्मयोगी प्लेटफार्म में ऑनबोर्डिंग कराने तथा रक्षित केन्द्र में तैनात समस्त पुलिस अधिकारियों एवं जवानों को अपने सहायक/महिला आरक्षक के सहयोग से आई-गॉट कर्मयोगी प्लेटफार्म के माध्यम से तीनों नवीन कानून में प्रशिक्षण कराने हेतु प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया गया।

2025 आरक्षक जीडी संवर्ग भर्ती हेतु विशेष कोचिंग के आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान - परीयना प्रशिक्षण के अंतर्गत आरक्षक जीडी संवर्ग भर्ती के अंतर्गत लिखित परीक्षा की तैयारी के लिए रक्षित केन्द्र, नारायणपुर में विशेष कोचिंग का आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया।

2026 - स्थानांतरण पर व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर में कार्यभार ग्रहण पुलिस मुख्यालय, रायपुर के आदेशानुसार जिला पुलिस नारायणपुर से व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर में कार्यभार ग्रहण किया।

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मंगलवार, सितंबर 22, 2026

हार्ट अटैक के मुख्य कारण और बचाव के लिए आहार प्रबंधन



हार्ट अटैक के मुख्य कारण और बचाव के लिए आहार प्रबंधन
- लेखक : श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी

हार्ट अटैक अर्थात तीव्र मायोकार्डियल इन्फार्क्शन एक गंभीर हृदयवाहिका आपातस्थिति है, जिसमें हृदय की मांसपेशी तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति अचानक बाधित हो जाती है। सामान्यतः इसका संबंध कोरोनरी धमनियों में एथेरोस्क्लेरोटिक प्लाक के टूटने और उसके स्थान पर रक्त का थक्का बनने से होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, “Cardiovascular diseases (CVDs) are the leading cause of death globally.” वर्ष 2022 में अनुमानित 19.8 मिलियन लोगों की मृत्यु हृदयवाहिका रोगों के कारण हुई, जो विश्व की कुल मौतों का लगभग 32 प्रतिशत थी। इनमें लगभग 85 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हुईं।

हार्ट अटैक का जोखिम केवल आनुवंशिक या उम्र संबंधी कारकों पर निर्भर नहीं करता। अस्वास्थ्यकर आहार, उच्च रक्तचाप, रक्त में असामान्य लिपिड, बढ़ा हुआ रक्त ग्लूकोज, अधिक वजन एवं मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और तंबाकू सेवन जैसे अनेक परिवर्तनीय कारक इसके जोखिम को प्रभावित करते हैं। डब्ल्यूएचओ का स्पष्ट कथन है, “Most heart attacks can be prevented by controlling a small number of behavioural and metabolic risk factors.”

आहार प्रबंधन हार्ट अटैक की प्राथमिक रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेष रूप से नमक, संतृप्त वसा, औद्योगिक ट्रांस-फैट और मुक्त शर्करा का सेवन सीमित करना तथा साबुत अनाज, दालों, फलियों, सब्जियों और फलों का सेवन बढ़ाना रक्तचाप, शरीर के वजन और रक्त लिपिड जैसे परिवर्तनीय जोखिम कारकों को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है।

हृदय शरीर के प्रत्येक अंग तक रक्त, ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाने का कार्य करता है। हृदय की मांसपेशियों को स्वयं रक्त की आपूर्ति कोरोनरी धमनियों के माध्यम से होती है। इन धमनियों में एथेरोस्क्लेरोटिक प्लाक जमा होने पर उनका मार्ग संकरा हो सकता है। यदि प्लाक टूट जाता है और वहां रक्त का थक्का बन जाता है, तो रक्त प्रवाह अचानक रुक सकता है और हार्ट अटैक हो सकता है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, “A heart attack occurs when one of the coronary arteries that supply blood to the heart muscle becomes blocked, usually by a blood clot that forms where a fatty deposit (atherosclerotic plaque) has ruptured.”

इस प्रक्रिया को केवल अचानक घटने वाली घटना मानना पर्याप्त नहीं है। कोरोनरी धमनियों में एथेरोस्क्लेरोसिस का विकास कई वर्षों में हो सकता है और इसके पीछे जीवनशैली, आहार, रक्तचाप, रक्त लिपिड, रक्त शर्करा और तंबाकू जैसे कारकों का संयुक्त प्रभाव रहता है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू सेवन और हानिकारक शराब सेवन प्रमुख व्यवहारगत जोखिम कारक हैं, जबकि उच्च रक्तचाप, उच्च रक्त ग्लूकोज, असामान्य रक्त लिपिड और अधिक वजन या मोटापा महत्वपूर्ण मेटाबोलिक जोखिम कारक हैं।

📂 हार्ट अटैक के प्रमुख कारण
हार्ट अटैक का जोखिम सामान्यतः किसी एक कारण से निर्धारित नहीं होता। विभिन्न जोखिम कारक एक-दूसरे को प्रभावित करते हुए कुल कार्डियोवैस्कुलर जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

☀️ उच्च रक्तचाप
लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप रक्तवाहिकाओं की दीवारों पर अतिरिक्त दबाव डालता है और लंबे समय में वैस्कुलर डैमेज तथा एथेरोस्क्लेरोसिस के विकास में योगदान कर सकता है। उच्च सोडियम सेवन भी रक्तचाप बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण आहार संबंधी कारक है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, “high intake of sodium (salt) is associated with increased blood pressure which can lead to cardiovascular disease.”

☀️ असामान्य रक्त लिपिड
एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और अन्य असामान्य लिपिड स्तर एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवैस्कुलर डिजीज़ के महत्वपूर्ण कारकों में शामिल हैं। आहार में संतृप्त वसा और ट्रांस-फैट की अधिकता तथा आवश्यकता से अधिक कैलोरी का सेवन लिपिड प्रोफाइल और शरीर के वजन को प्रभावित कर सकता है।

☀️ तंबाकू सेवन
धूम्रपान और अन्य तंबाकू उत्पाद कार्डियोवैस्कुलर जोखिम को बढ़ाते हैं। तंबाकू छोड़ना हार्ट अटैक की प्राथमिक रोकथाम का एक महत्वपूर्ण उपाय है। डब्ल्यूएचओ कार्डियोवैस्कुलर डिजीज़ की रोकथाम में तंबाकू छोड़ने को प्रमुख उपायों में शामिल करता है।

☀️ मधुमेह और उच्च रक्त ग्लूकोज
लंबे समय तक बढ़ा हुआ रक्त ग्लूकोज रक्तवाहिकाओं को प्रभावित कर सकता है और कार्डियोवैस्कुलर डिजीज़ का जोखिम बढ़ा सकता है। अधिक वजन, शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित आहार टाइप-2 डायबिटीज़ के जोखिम से जुड़े महत्वपूर्ण कारक हैं।

☀️ अधिक वजन और मोटापा
मोटापा अपने आप में तथा उच्च रक्तचाप, इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज़ और असामान्य लिपिड प्रोफाइल जैसे अनेक जोखिम कारकों के साथ जुड़ा है। इसलिए स्वस्थ बॉडी वेट बनाए रखना कार्डियोवैस्कुलर प्रिवेंशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

☀️ शारीरिक निष्क्रियता
नियमित शारीरिक गतिविधि का अभाव वजन बढ़ने, इंसुलिन रेजिस्टेंस और कार्डियोमेटाबोलिक जोखिम को बढ़ा सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि कार्डियोवैस्कुलर डिजीज़ के जोखिम को कम करने की महत्वपूर्ण रणनीति है।

☀️ अस्वास्थ्यकर आहार
अधिक नमक, फ्री शुगर, सैचुरेटेड फैट, इंडस्ट्रियल ट्रांस-फैट और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड वाला आहार तथा फल, सब्जियों, दालों और साबुत अनाज का कम सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए प्रतिकूल डाइटरी पैटर्न बना सकता है।


📂 आहार और हार्ट अटैक का संबंध
आहार सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से हृदयवाहिका स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। भोजन की गुणवत्ता रक्तचाप, रक्त ग्लूकोज, रक्त लिपिड, शरीर का वजन और मेटाबोलिक हेल्थ को प्रभावित कर सकती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार स्वस्थ आहार के मूल सिद्धांत “adequacy, balance, moderation and diversity” अर्थात पर्याप्तता, संतुलन, संयम और विविधता पर आधारित हैं। डब्ल्यूएचओ वयस्कों को प्रतिदिन कम-से-कम 400 ग्राम फल और सब्जियों का सेवन करने की सलाह देता है।

इसलिए हृदय-सुरक्षात्मक आहार का उद्देश्य केवल किसी एक पोषक तत्व को कम करना नहीं, बल्कि संपूर्ण भोजन-पैटर्न की गुणवत्ता में सुधार करना होना चाहिए।

📂 नमक: छोटा घटक, बड़ा प्रभाव
भारतीय भोजन में नमक केवल ऊपर से डाले जाने वाले टेबल सॉल्ट तक सीमित नहीं है। अचार, पापड़, नमकीन, पैकेज्ड स्नैक्स, सॉस, इंस्टेंट फूड और कई प्रोसेस्ड फूड भी सोडियम के महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार वयस्कों को प्रतिदिन “less than 5 grams of salt per day” का सेवन करना चाहिए, जो लगभग 2 ग्राम सोडियम के बराबर है। इस सीमा को ध्यान में रखते हुए भोजन में अतिरिक्त नमक घटाना, पैकेज्ड नमकीन खाद्य पदार्थों को कम करना और भोजन के स्वाद के लिए नींबू, जड़ी-बूटियों तथा मसालों का उपयोग करना व्यावहारिक रणनीति हो सकती है।

📂 वसा की मात्रा से अधिक महत्वपूर्ण है वसा की गुणवत्ता
यह धारणा कि हृदय की सुरक्षा के लिए हर प्रकार की वसा को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए, वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। शरीर को आवश्यक फैटी एसिड और फैट-सॉल्युबल विटामिन के लिए कुछ मात्रा में डाइटरी फैट की आवश्यकता होती है। महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि किस प्रकार की वसा और कितनी मात्रा में ली जा रही है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार सैचुरेटेड फैट कुल ऊर्जा के 10 प्रतिशत से कम और ट्रांस-फैट 1 प्रतिशत से कम होना चाहिए। डब्ल्यूएचओ विशेष रूप से इंडस्ट्रियल ट्रांस-फैट से बचने की सलाह देता है। इसका व्यावहारिक अर्थ है कि अत्यधिक तले हुए खाद्य पदार्थ, कुछ पैकेज्ड बेकरी प्रोडक्ट्स और ऐसे प्रोसेस्ड फूड जिनमें इंडस्ट्रियल ट्रांस-फैट हो, उन्हें सीमित किया जाना चाहिए। इसके स्थान पर अनसैचुरेटेड फैट वाले खाद्य स्रोतों को उचित मात्रा में शामिल किया जा सकता है।

📂 फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज
हृदय-सुरक्षात्मक भोजन में प्लांट-बेस्ड फूड्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। सब्जियां और फल डाइटरी फाइबर, पोटैशियम, विटामिन, मिनरल तथा विभिन्न बायोएक्टिव कंपाउंड प्रदान करते हैं। दालें और अन्य लेग्यूम्स प्रोटीन तथा फाइबर के उपयोगी स्रोत हैं।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार कार्बोहाइड्रेट मुख्यतः “whole grains, vegetables, fruits and pulses” से प्राप्त होने चाहिए। भारतीय भोजन प्रणाली में इसका अर्थ हो सकता है कि अत्यधिक रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट पर निर्भरता घटाकर दलिया, ओट्स, साबुत गेहूं, विभिन्न मिलेट्स, ब्राउन राइस, दालें, चना, राजमा और अन्य लेग्यूम्स को भोजन का हिस्सा बनाया जाए।

📂 अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और कार्डियोवैस्कुलर जोखिम
आधुनिक खाद्य व्यवस्था में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन तेजी से बढ़ा है। इनमें कुछ पैकेज्ड स्नैक्स, प्रोसेस्ड मीट, शुगर-स्वीटेंड बेवरेज और अन्य अत्यधिक इंडस्ट्रियल रूप से तैयार खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं।

2024 में प्रकाशित एक बड़े सिस्टमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस में 22 प्रोस्पेक्टिव स्टडीज को शामिल किया गया। इसमें अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के अधिक सेवन और कार्डियोवैस्कुलर डिजीज़ तथा कोरोनरी हार्ट डिजीज़ के जोखिम के बीच सकारात्मक संबंध पाया गया।

एक अन्य डोज-रिस्पॉन्स मेटा-एनालिसिस में 20 स्टडीज और 1,101,073 प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के सेवन और कार्डियोवैस्कुलर घटनाओं के बीच सकारात्मक संबंध पाया गया।

हालांकि यह महत्वपूर्ण है कि ऐसे अधिकांश अध्ययन ऑब्जर्वेशनल होते हैं। इसलिए किसी संबंध को सीधे कारण-परिणाम के रूप में नहीं माना जा सकता। फिर भी उपलब्ध साक्ष्य अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को सीमित करने और कम प्रोसेस्ड, प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने के पक्ष में हैं।

📂 मेडिटेरेनियन डाइट से मिलने वाले संकेत
मेडिटेरेनियन डाइटरी पैटर्न में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, नट्स, सीड्स तथा मुख्यतः अनसैचुरेटेड फैट को प्राथमिकता दी जाती है और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड तथा अस्वास्थ्यकर वसा को सीमित किया जाता है।

2024 में प्रकाशित रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल्स की सिस्टमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस में मेडिटेरेनियन डाइट के कार्डियोवैस्कुलर प्रिवेंशन प्रभावों का मूल्यांकन किया गया। उपलब्ध क्लिनिकल ट्रायल एविडेंस में मायोकार्डियल इन्फार्क्शन और स्ट्रोक सहित विभिन्न कार्डियोवैस्कुलर आउटकम का अध्ययन किया गया।

भारतीय परिस्थितियों में मेडिटेरेनियन डाइट को हूबहू अपनाना आवश्यक नहीं है। इसके मूल सिद्धांतों—अधिक सब्जियां, फल, दालें और साबुत अनाज तथा हेल्दी फैट और कम प्रोसेस्ड फूड—को भारतीय खाद्य परंपरा के अनुरूप अपनाया जा सकता है।

📂 डब्ल्यूएचओ आधारित हृदय-सुरक्षात्मक आहार के प्रमुख लक्ष्य
डब्ल्यूएचओ की वर्तमान हेल्दी-डाइट गाइडेंस के आधार पर सामान्य वयस्कों के लिए निम्न लक्ष्य महत्वपूर्ण हैं:
🌼 फल एवं सब्जियां: कम-से-कम 400 ग्राम प्रतिदिन।
🌼 नमक: 5 ग्राम प्रतिदिन से कम।
🌼 सोडियम: 2 ग्राम प्रतिदिन से कम।
🌼 फ्री शुगर: कुल दैनिक ऊर्जा का 10 प्रतिशत से कम। अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ के लिए इसे लगभग 5 प्रतिशत तक कम करना लाभकारी हो सकता है।
🌼 सैचुरेटेड फैट: कुल ऊर्जा का 10 प्रतिशत से कम।
🌼 ट्रांस-फैट: कुल ऊर्जा का 1 प्रतिशत से कम तथा इंडस्ट्रियल ट्रांस-फैट से बचाव।

📂 भारतीय संदर्भ में एक व्यावहारिक आहार मॉडल
🌼 नाश्ता: दलिया, ओट्स, वेजिटेबल पोहा या अन्य होल-ग्रेन आधारित विकल्प।
🌼 मध्य-सुबह: एक मौसमी पूरा फल।
🌼 दोपहर: पर्याप्त सब्जियां + दाल/चना/राजमा जैसी दालें या फलियां + साबुत अनाज आधारित रोटी या अन्य अनाज + सलाद।
🌼 शाम: कम नमक वाला मिनिमली प्रोसेस्ड स्नैक तथा बिना अतिरिक्त चीनी वाला पेय।
🌼 रात्रि: हल्का भोजन, पर्याप्त सब्जियां और दाल/फलियां या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत।

 

💡 भोजन तैयार करने की विधि में डीप-फ्राइंग की जगह स्टीमिंग, बॉइलिंग, रोस्टिंग या कम तेल में कुकिंग को प्राथमिकता दी जा सकती है।

 ⚠️ यह सामान्य प्रिवेंटिव डाइटरी फ्रेमवर्क है, किसी विशेष रोगी के लिए मेडिकल डाइट प्रिस्क्रिप्शन नहीं। पहले से हार्ट डिजीज़, किडनी डिजीज़, डायबिटीज़, हाइपरटेंशन या अन्य क्रॉनिक डिजीज़ वाले व्यक्ति के लिए डाइट को चिकित्सक या रजिस्टर्ड डायटिशियन की सलाह के अनुसार व्यक्तिगत रूप से निर्धारित करना आवश्यक है।


📂 भोजन के साथ जीवनशैली में परिवर्तन
हार्ट अटैक की रोकथाम को केवल भोजन तक सीमित नहीं किया जा सकता। तंबाकू से पूर्ण परहेज, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ बॉडी वेट, ब्लड प्रेशर और ब्लड ग्लूकोज का नियंत्रण तथा आवश्यकता के अनुसार लिपिड प्रोफाइल की जांच समग्र कार्डियोवैस्कुलर प्रिवेंशन का हिस्सा हैं।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, “Most cardiovascular diseases can be prevented by addressing behavioural and environmental risk factors such as tobacco use, unhealthy diet ... obesity, physical inactivity.” इसलिए स्वस्थ भोजन तभी अधिक प्रभावी प्रिवेंटिव स्ट्रेटेजी बनता है जब उसके साथ सक्रिय जीवनशैली और आवश्यक मेडिकल स्क्रीनिंग भी जुड़ी हो।

📂 निष्कर्ष
हार्ट अटैक किसी एक भोजन, एक दिन की गलती या केवल उम्र का परिणाम नहीं है। इसके पीछे वर्षों में विकसित होने वाले एथेरोस्क्लेरोटिक और मेटाबोलिक जोखिम कारकों का योगदान हो सकता है। उच्च रक्तचाप, असामान्य रक्त लिपिड, डायबिटीज़, तंबाकू सेवन, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और अस्वास्थ्यकर आहार इसके महत्वपूर्ण परिवर्तनीय जोखिम कारक हैं।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार इन जोखिम कारकों को नियंत्रित करके हार्ट अटैक और अन्य कार्डियोवैस्कुलर डिजीज़ के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

हृदय-सुरक्षात्मक आहार का मूल सिद्धांत किसी एक “सुपरफूड” की खोज नहीं, बल्कि संपूर्ण डाइटरी पैटर्न में सुधार है। अधिक सब्जियां, फल, दालें और साबुत अनाज; पर्याप्त डाइटरी फाइबर; नियंत्रित नमक और फ्री शुगर; तथा सैचुरेटेड और इंडस्ट्रियल ट्रांस-फैट में कमी इस रणनीति के प्रमुख घटक हैं।

डब्ल्यूएचओ का “at least 400 grams of fruits and vegetables per day” और “less than 5 grams of salt per day” वाला लक्ष्य इस दिशा में स्पष्ट और व्यावहारिक आधार प्रदान करता है।

अतः हार्ट अटैक की रोकथाम को एक दीर्घकालिक लाइफस्टाइल स्ट्रेटेजी के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसमें संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, तंबाकू से दूरी, स्वस्थ बॉडी वेट और समय पर स्वास्थ्य जांच एक-दूसरे के पूरक हैं। भोजन का उद्देश्य केवल पेट भरना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक मेटाबोलिक और कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ को बनाए रखना भी होना चाहिए।

लेखक:
(श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी) 
बी.एससी./डिप्लोमा इन इलेक्ट्रोपेथी साइंस
श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी राष्ट्रीय सेवा से जुड़ी हुई एक समाजसेवी महिला हैं जो पिछले 10 वर्षों से निरंतर WWW.THEBHARAT.CO.IN के माध्यम से देश के आम नागरिकों खासकर युवाओं का मार्गदर्शन करती हैं। श्रीमती जोशी सामाजिक न्याय, सामाजिक समरसता और कमजोर वर्ग तथा महिलाओं की उचित प्रतिनिधित्व की वकालत करती हैं।

मंगलवार, सितंबर 15, 2026

स्मार्टफोन की स्क्रीन पर खोता बचपन; सोशल मीडिया और रील्स की लत का बढ़ता खतरा — एच.पी. जोशी


स्मार्टफोन की स्क्रीन पर खोता बचपन; सोशल मीडिया और रील्स की लत का बढ़ता खतरा
— एच.पी. जोशी

«“जिस प्रकार शराब की लत एक इंसान की पूरी जिंदगी बर्बाद कर देती है, ठीक वैसे ही सोशल मीडिया और रील्स बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं।”»
"Just as alcohol addiction ruins a person's entire life, social media and reels are ruining children's futures."

एक समय था जब माता-पिता बच्चों को शराब, सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों से बचाने के लिए चिंतित रहते थे। आज खतरे का एक नया रूप हमारे घरों में प्रवेश कर चुका है—एक ऐसा खतरा जो बोतल में नहीं आता, जिसकी कोई गंध नहीं होती और जिसे अक्सर हम स्वयं बच्चे के हाथ में देकर खुश होते हैं।
वह है—स्मार्टफोन।
स्मार्टफोन स्वयं समस्या नहीं है। इंटरनेट भी समस्या नहीं है। समस्या उस डिजिटल वातावरण की है, जिसमें एक बच्चा कुछ सेकंड के मनोरंजन के लिए स्क्रीन खोलता है और फिर Algorithmically चुने गए वीडियो की अंतहीन श्रृंखला में फंसता चला जाता है।
रील समाप्त होती है। अगली शुरू हो जाती है।
फिर अगली।
और देखते-देखते बच्चे का वह समय, जो खेल, किताब, नींद, बातचीत, कल्पना और सीखने में लगना चाहिए था, स्क्रीन पर खर्च हो जाता है।
यहीं हमें एक असहज लेकिन जरूरी सवाल पूछना चाहिए—
क्या हम बच्चों को तकनीक दे रहे हैं, या तकनीक को हमारे बच्चों का बचपन दे रहे हैं?

📂 "स्मार्टफोन उपयोग करना स्मार्ट होने का प्रमाण नहीं"
हमने आधुनिक तकनीक को “स्मार्ट” नाम दिया और शायद अनजाने में उसके उपयोगकर्ता को भी स्मार्ट मान लिया। लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।

«“स्मार्टफोन उपयोग के मामले में स्मार्ट फोन होता है, यूजर्स नहीं। इसलिए स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले बच्चों को Smart समझना सबसे बड़ी मूर्खता है।”»
"When it comes to smartphone usage, the phone is smart, not the user. Therefore, considering children who use smartphones to be 'smart' is the height of foolishness."

स्मार्टफोन का उपयोग करना और स्मार्ट तरीके से उसका उपयोग करना—दो अलग बातें हैं। किसी बच्चे के पास अत्याधुनिक फोन हो सकता है, उसके पास हजारों ऐप हो सकते हैं और वह सोशल मीडिया के हर नए ट्रेंड से परिचित हो सकता है। लेकिन यदि वह अपने स्क्रीन टाइम को नियंत्रित नहीं कर सकता, लगातार Notification की प्रतीक्षा करता है, रील्स बंद नहीं कर पाता, नींद की कीमत पर स्क्रीन देखता है और वास्तविक जीवन की गतिविधियों में रुचि खोने लगता है, तो उसे “Smart” कहना तकनीकी सुविधा को मानवीय विवेक समझने की सबसे बड़ी भूल होगी।

📂 "तकनीकी दक्षता और मानसिक परिपक्वता एक ही चीज नहीं हैं।"
रील्स केवल मनोरंजन नहीं, ध्यान की अर्थव्यवस्था हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ता का ध्यान प्राप्त करने और उसे अधिक से अधिक समय तक बनाए रखने के लिए Sophisticated Recommendation Systems का उपयोग करते हैं। यहां समस्या केवल सामग्री की नहीं, डिजाइन की भी है।
रील्स छोटी हैं।
तेज हैं।
लगातार बदलती हैं।
और अगली सामग्री तक पहुंचने के लिए किसी विशेष प्रयास की आवश्यकता नहीं होती।
इस मॉडल में उपयोगकर्ता को बार-बार निर्णय लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती—Algorithm अगली चीज सामने रख देता है।
एक वयस्क शायद इस व्यवस्था को समझकर अपने व्यवहार को नियंत्रित कर सके। लेकिन बच्चों से वही आत्मनियंत्रण अपेक्षित करना कितना उचित है, जिनका मस्तिष्क अभी विकास की प्रक्रिया में है?
यही वह बिंदु है जहां सोशल मीडिया का प्रश्न केवल “व्यक्तिगत पसंद” का प्रश्न नहीं रह जाता। यह बाल संरक्षण का प्रश्न बन जाता है।

📂 "बचपन का समय वापस नहीं आता"
बच्चे के विकास में समय सबसे मूल्यवान संसाधन है। जो समय खेल में जाना था, वह स्क्रीन में चला गया। जो समय किताब पढ़ने में जाना था, वह वीडियो में चला गया। जो समय माता-पिता से बातचीत में जाना था, वह Notification में चला गया। जो समय बच्चे को स्वयं से मिलने में मिलना चाहिए था, वह लगातार बदलती स्क्रीन ने भर दिया।
बच्चे के व्यक्तित्व का निर्माण केवल स्कूल की किताबों से नहीं होता। खेल का मैदान उसे सहयोग और प्रतिस्पर्धा सिखाता है। असफलता उसे धैर्य सिखाती है। परिवार उसे संबंधों का अर्थ समझाता है। प्रकृति उसे जिज्ञासा देती है। किताबें उसकी कल्पना को विस्तृत करती हैं।
यदि इन सबकी जगह लगातार Short-Form Digital Stimulation ले ले, तो हमें केवल यह नहीं पूछना चाहिए कि बच्चे ने कितने घंटे मोबाइल देखा।
हमें पूछना चाहिए— उसने वे घंटे किन अनुभवों से खो दिए?

📂 "संविधान की दृष्टि से यह केवल पारिवारिक मामला नहीं"
भारत का संविधान बच्चों को केवल शिक्षा का अधिकार नहीं देता, बल्कि उनके स्वस्थ विकास और संरक्षण के प्रति भी राज्य की जिम्मेदारी निर्धारित करता है।
अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को संवैधानिक संरक्षण देता है। न्यायपालिका ने समय के साथ “जीवन” को केवल शारीरिक अस्तित्व तक सीमित न रखते हुए गरिमापूर्ण जीवन और उससे जुड़े व्यापक आयामों से जोड़ा है। अनुच्छेद 21A बच्चों के लिए शिक्षा के अधिकार को संवैधानिक आधार प्रदान करता है।
वहीं अनुच्छेद 39(e) और 39(f) राज्य की नीति को इस दिशा में निर्देशित करते हैं कि बच्चों की कोमल आयु का दुरुपयोग न हो तथा उन्हें स्वस्थ विकास, स्वतंत्रता और गरिमा के वातावरण में अवसर और सुविधाएं मिलें।
डिजिटल युग में इन संवैधानिक मूल्यों की व्याख्या का दायरा स्वाभाविक रूप से एक नए प्रश्न तक पहुंचता है— "क्या बच्चों का डिजिटल वातावरण उनके स्वस्थ विकास और गरिमा के अनुकूल है?" यह प्रश्न आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण होने वाला है।

📂 "बाल अधिकारों का वैश्विक दृष्टिकोण"
यह केवल भारत की समस्या नहीं है
दुनिया के लगभग हर समाज में बच्चे अब डिजिटल वातावरण में बड़े हो रहे हैं। इसी कारण संयुक्त राष्ट्र का Convention on the Rights of the Child (CRC) आज डिजिटल युग में और अधिक प्रासंगिक हो गया है। CRC का Article 3 बच्चों से संबंधित निर्णयों में उनके Best Interests को प्राथमिक Consideration देने की बात करता है। Article 17 बच्चों की सूचना और मीडिया तक पहुंच के अधिकार को स्वीकार करते हुए उनके कल्याण के लिए हानिकारक सामग्री से सुरक्षा की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। और Article 19 बच्चों को मानसिक या शारीरिक हिंसा, दुर्व्यवहार, उपेक्षा और शोषण से सुरक्षा प्रदान करने के लिए उचित उपायों की अपेक्षा करता है।
इसका अर्थ यह नहीं कि बच्चों को डिजिटल दुनिया से अलग कर दिया जाए; बल्कि डिजिटल दुनिया को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाया जाए।

📂 "न्यायपालिका की बदलती चिंता"
दुनिया भर की न्यायिक और नीति-निर्माण संस्थाओं के सामने अब यह सवाल तेजी से उभर रहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों की सुरक्षा के लिए कितनी जिम्मेदारी वहन करें।
भारत में भी यह विषय न्यायिक विमर्श तक पहुंच चुका है।हाल ही में सितंबर 2026 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष नाबालिगों के सोशल मीडिया उपयोग से जुड़े सुरक्षा उपायों की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह किसी अंतिम प्रतिबंध या अंतिम न्यायिक निष्कर्ष का संकेत नहीं है। लेकिन यह घटनाक्रम यह अवश्य दिखाता है कि नाबालिगों की डिजिटल सुरक्षा अब निजी पारिवारिक चिंता भर नहीं रह गई है। बल्कि यह सार्वजनिक नीति, बाल अधिकार और संवैधानिक संरक्षण का विषय बन रही है।

📂 "क्या माता-पिता ही दोषी हैं?"
बच्चों के मोबाइल उपयोग पर चर्चा होते ही अक्सर सारा दोष माता-पिता पर डाल दिया जाता है।
यह दृष्टिकोण अधूरा है।
हां, माता-पिता की जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लेकिन एक ऐसे डिजिटल वातावरण में, जिसे उपयोगकर्ता का ध्यान अधिक से अधिक समय तक बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया हो, केवल माता-पिता से पूरी समस्या हल करने की अपेक्षा करना भी उचित नहीं है।
हमें तीन स्तरों पर जिम्मेदारी तय करनी होगी—
☀️ परिवार की जिम्मेदारी। बच्चों के लिए स्पष्ट और आयु-उपयुक्त डिजिटल नियम।
☀️ विद्यालय और समाज की जिम्मेदारी। Digital Literacy के साथ Digital Discipline और Cyber Safety की शिक्षा।
☀️ प्लेटफॉर्म और सरकार की जिम्मेदारी। नाबालिगों के लिए मजबूत Privacy Safeguards, Age-Appropriate Design, Parental Controls और Harmful या Exploitative Content से बेहतर सुरक्षा।
बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उस बच्चे से नहीं ली जा सकती जो अभी स्वयं निर्णय लेने की क्षमता विकसित कर रहा है।

📂 "समाधान मोबाइल छीनना नहीं; बल्कि डिजिटल विवेक पैदा करना है"
बच्चों को तकनीक से पूरी तरह दूर करना न तो संभव है, न आवश्यक।भविष्य की शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन डिजिटल तकनीक से गहराई से जुड़ा होगा।इसलिए हमें बच्चों को दो चीजें साथ-साथ सिखानी होंगी—
Technology Skills और Self-Control।
उन्हें यह समझना होगा कि हर Notification महत्वपूर्ण नहीं है। हर Viral Video उपयोगी नहीं है। हर Influencer आदर्श नहीं है। हर Trend का अनुसरण आवश्यक नहीं है। और हर खाली मिनट को स्क्रीन से भरना जरूरी नहीं है।
बच्चे को यह सीखना होगा कि कब फोन उठाना है और कब फोन नीचे रखना है।

📂 "सबसे प्रभावी Parental Control—माता-पिता स्वयं"
बच्चे वही नहीं करते जो हम कहते हैं। वे बहुत बार वही करते हैं जो वे हमें करते हुए देखते हैं। यदि भोजन की मेज पर माता-पिता भी फोन पर हैं, यदि बातचीत के बीच Notification अधिक महत्वपूर्ण है, यदि घर में हर खाली क्षण स्क्रीन से भर दिया जाता है, तो बच्चों से डिजिटल अनुशासन की अपेक्षा करना कठिन होगा। इसलिए बच्चों के लिए पहला Digital Detox किसी ऐप में नहीं, परिवार के व्यवहार में होना चाहिए।

☀️ घर में कुछ सरल नियम प्रभावी हो सकते हैं
- No-phone meals.
- Screen-free bedtime.
- Age-appropriate screen limits.
- Outdoor play.
- Family conversation.
और सबसे महत्वपूर्ण—
- बच्चे के साथ समय।

📂 "हमें तकनीक से नहीं; बल्कि तकनीक की गुलामी से बचना है"
यह लड़ाई स्मार्टफोन के विरुद्ध नहीं है। यह लड़ाई असंयमित उपयोग के विरुद्ध है। यह सोशल मीडिया को बंद करने की मांग नहीं है।
यह मांग है कि सोशल मीडिया का उपयोग बच्चों के अधिकारों और कल्याण की कीमत पर न हो।
यह इंटरनेट को रोकने की बात नहीं है। यह बात है कि इंटरनेट की दुनिया में प्रवेश करने वाले बच्चे की गरिमा, सुरक्षा, मानसिक स्वतंत्रता और विकास सुरक्षित रहें।
आज हमारे पास एक ऐतिहासिक अवसर है। हम ऐसी डिजिटल संस्कृति बना सकते हैं जिसमें तकनीक बच्चे की क्षमता बढ़ाए, उसके समय को निगले नहीं; उसे ज्ञान दे, ध्यान न छीने; उसे दुनिया से जोड़े, वास्तविक रिश्तों से अलग न करे।
क्योंकि बचपन जीवन का वह हिस्सा है जिसे दोबारा डाउनलोड नहीं किया जा सकता।
रील दोबारा देखी जा सकती है।
वीडियो दोबारा चलाया जा सकता है। लेकिन बीता हुआ बचपन दोबारा नहीं आता।
इसलिए आज सबसे जरूरी सवाल यह नहीं है कि—“बच्चा कितनी रील्स देख रहा है?” बल्कि सवाल यह है— “रील्स देखते-देखते वह अपने जीवन से क्या खो रहा है?”
हमें बच्चों के हाथ में तकनीक अवश्य देनी चाहिए— लेकिन तकनीक के हाथ में बच्चों का भविष्य नहीं।

— एच.पी. जोशी
(लेखक, विचारक, दार्शनिक एवं पुलिस अधिकारी)
लेखक श्री हुलेश्वर प्रसाद जोशी जी "मानव अधिकार के अनछुए पहलू" नामक ग्रन्थ के लेखक हैं।

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